Indian Citizenship Proof: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट को कभी भी भारतीय नागरिकता का अंतिम या निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में न तो हाल में और न ही पिछले 12 वर्षों में कोई नया निर्णय लिया गया है। सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का उल्लेख किया, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं।
धारा 20 के अनुसार,”पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने से संबंधित अन्य प्रावधानों के बावजूद, यदि केंद्र सरकार जनहित में आवश्यक समझे, तो वह किसी ऐसे व्यक्ति को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है जो भारत का नागरिक नहीं है।सरकार ने यह भी बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 में अपने फैसलों में स्पष्ट किया था कि केवल पासपोर्ट का होना किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता साबित नहीं करता।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब विदेश मंत्रालय ने एक विस्तृत प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इस बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार की आलोचना की। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर कौन-सा दस्तावेज नागरिकता साबित करेगा?
उन्होंने लिखा, “MEA, 24 जून 2026: ‘पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का दस्तावेज नहीं।’ फिर नागरिकता का प्रमाण कौन-सा दस्तावेज है? यदि BLO मेरी नागरिकता पर संदेह कर सकता है और मुझे वोट देने के अधिकार से वंचित कर सकता है, तो इसका परिणाम क्या होगा? अब इस पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला करना होगा।”
वहीं, भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने कोई नई नीति घोषित नहीं की है, बल्कि केवल लंबे समय से स्थापित कानूनी स्थिति को दोहराया है। उन्होंने X पर लिखा कि भारतीय अदालतें कई बार यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है। उन्होंने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत पात्रता और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है, न कि केवल किसी एक दस्तावेज के आधार पर।
मालवीय ने कहा कि भारत में नागरिकता साबित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता की नागरिकता से जुड़े रिकॉर्ड, स्कूल रिकॉर्ड, मतदाता सूची में नाम, सरकारी सेवा से जुड़े दस्तावेज, भूमि और निवास संबंधी रिकॉर्ड, पासपोर्ट तथा अन्य सरकारी अभिलेखों सहित कई दस्तावेजों को देखा जाता है।
उन्होंने आगे कहा, “पासपोर्ट एक महत्वपूर्ण पहचान और यात्रा दस्तावेज है, जो नागरिकता के दावे का समर्थन कर सकता है। लेकिन नागरिकता का अधिकार संविधान और नागरिकता अधिनियम से प्राप्त होता है, न कि किसी एक सरकारी दस्तावेज के स्वामित्व से।” अमित मालवीय ने यह भी कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 स्वयं यह स्वीकार करता है कि विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है। इसलिए केवल पासपोर्ट का होना नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, “वर्तमान विवाद किसी नई व्यवस्था को लेकर नहीं है, बल्कि उस कानूनी स्थिति को लेकर है जो लंबे समय से कानून और अदालतों के फैसलों द्वारा स्थापित है।”
उल्लेखनीय है कि भारत ने हाल ही में 14वां पासपोर्ट सेवा दिवस मनाया। यह दिवस 24 जून 1967 को पासपोर्ट अधिनियम लागू होने की स्मृति में मनाया जाता है। इसी अवसर पर विदेश मंत्रालय ने 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में तीन दिवसीय वार्षिक क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी सम्मेलन का आयोजन भी किया।