West Bengal:पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम ढह जाने से कम से कम पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, हादसे के नौ घंटे बाद भी कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।
यह गोदाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट क्षेत्र की एक निजी पट्टे की जमीन पर बनाया जा रहा था। हादसे के बाद पुलिस ने निर्माण स्थल के सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार तथा मजदूर उपलब्ध कराने वाले मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। गोदाम मालिकों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान स्वीकृत सभी निर्माण परियोजनाओं पर 31 जुलाई तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में इमारत की डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंक्रीट का भार संभालने के लिए इस्तेमाल की गई लोहे की बीम पर्याप्त मजबूत नहीं थीं। अधिकारियों ने मंजूरशुदा नक्शों और अन्य दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
घटनास्थल पर कोलकाता पुलिस, अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नागरिक सुरक्षा बल और सेना की पूर्वी कमान संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। भारी कंक्रीट और लोहे के मलबे को हटाने के लिए क्रेन, गैस कटर और विशेष मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फंसे लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन की भी मदद ली जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन समूह, नागरिक सुरक्षा और अग्निशमन और आपात सेवा की टीम घटनास्थल पर बचाव कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी भी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं जबकि गिर चुके लोहे के बीम को हटाने के लिए क्रेन और मशीनों को लगाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार लोहे और कंक्रीट को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा किया गया और बचावकर्मी ‘वर्टिकल ड्रिलिंग’ के जरिए मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
मलबे से निकाले गए सभी घायलों को एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। इनमें से तीन की हालत गंभीर बताई गई है। अस्पताल प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर इलाज शुरू कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोदाम में ढलाई का काम चल रहा था तभी अचानक लोहे के बीम और कंक्रीट के बड़े हिस्से ढह गए, जिससे पूरा ढांचा भरभराकर गिर पड़ा। घटना के समय कई मजदूर निर्माण कार्य में जुटे हुए थे।
राज्य सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण प्रक्रिया, स्वीकृत नक्शे और संभावित अनियमितताओं की हर पहलू से जांच की जाएगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है।