PM Modi: ‘बंगाल बेड़ियों से आजाद हो गया है’, तारकेश्वर में PM मोदी का TMC-लेफ्ट पर हमला

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल दौरे पर पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के बैंक खातों में दो-दो हजार रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद अपने संबोधन के दौरान उन्होंने राज्य में सत्ता परिवर्तन को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने बंगाल के तारकेश्वर में आयोजित इस कार्यक्रम में कहा कि ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के मौके पर मैं लोगों को बधाई और शुभकामनाएं देना चाहता हूं।

प्रधानमंत्री ने बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनने पर खुशी भी जाहिर की, उन्होंने कहा कि बंगाल की हवा में एक नई ताजगी है, मानो राज्य अब बेड़ियों से आजाद हो गया हो। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने बंगाल के विकास के लिए बहुत तेजी से काम करना शुरू कर चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा, ‘गुलामी के दौर में हमारे बंगाल ने क्या कुछ नहीं सहा, कितने बलिदान दिए, कितने त्याग सहे, 1946 में कोलकाता में हिंसा हुई थी, तब कितने निर्दोष बंगाली लोग उसकी भेंट चढ़ गए। बंगाल ने रक्तपात सहा, अपनों को खोया, अपनी मातृभूमि के टुकड़े होते देखे, लेकिन बंगाल ने अपनी अस्मिता और पहचान को नष्ट नहीं होने दिया। इसी का परिणाम था कि जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश हो रही थी तब अलग पश्चिम बंगाल बनाकर उन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया गया। पश्चिम बंगाल दिवस के रूप में हम केवल एक तारीख को याद नहीं कर रहे, बल्कि पूरे इतिहास को याद कर रहे हैं।’

पीएम मोदी ने कहा कि आज की पीढ़ी को हमें बार-बार पश्चिम बंगाल दिवस की अहमियत बताने की जरूरत है। उस दौरान क्या हुआ था यह युवा पीढ़ी को जानने की जरूरत है, जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिश हो रही थी तो कांग्रेस उन षड्यंत्रकारियों के सामने घुटने टेक रही थी। यही वह समय था जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई। अप्रैल 1947 में उन्होंने ऐतिहासिक रिसॉल्यूशन पास कराया। उन्होंने घोषणा की कि पूरा बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बनेगा, इसके लिए बंगाली-हिंदू होमलैंड मूवमेंट शुरू किया गया।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि जिस भावना से पश्चिम बंगाल को बचाया गया था, आजादी के बाद उसी भावना पर इसे आगे बढ़ाने की जरूरत थी। लेकिन दुर्भाग्य से ठीक इससे उलट काम हुआ। पश्चिम बंगाल दिवस और इसकी भावना को भुलाने की कोशिश हुई। सियासी एजेंडों के कारण इतिहास का व्हाइटवॉश किया गया। विभाजन के समय जो कांग्रेस बंगाल को लावारिस छोड़ना चाहती थी, विभाजन के बाद उसने बचे हुए पश्चिम बंगाल में भी तुष्टिकरण के खेल खेलने शुरू किए। पश्चिम बंगाल के इतिहास को दबाया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक बने, इसलिए उनके योगदान को नकारा गया।

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