UP News: नेपाल ने भारत से आम के आयात पर रोक लगाई, कीमतों में भारी गिरावट की आशंका

UP News: गर्मी के मौसम में फलों के राजा कहे जाने वाले- आम की बंपर पैदावार होती है। उत्तर प्रदेश में इसकी सबसे ज्यादा पैदावार होती है। प्रदेश के आम किसानों के लिए ये मौसम बंपर पैदावार के साथ अनिश्चितता लेकर आया है। नेपाल ने भारत से आम के आयात पर रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि आम की खेप में कीटनाशकों की मात्रा बहुत ज्यादा है और सीमावर्ती इलाकों में क्वारंटीन की पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।

नेपाल के इस फैसले से भारतीय आम के निर्यात पर असर पड़ा है, जिससे किसानों को अपनी उपज स्थानीय स्तर पर ही बेचनी पड़ रही है। किसानों और व्यापारियों को डर है कि इससे बाजार में आम की जरूरत से ज्यादा सप्लाई हो सकती है, जिससे कीमतें गिरेंगी और उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी।

सहारनपुर समेत राज्य के दूसरे जिलों में आम की पैदावार करने वाले किसान सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो नेपाल के अधिकारियों से बात करे और जल्द से जल्द समाधान निकाले। फलों से लदे बागों के बीच अब उन हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं जो आम के कारोबार पर निर्भर हैं।

नेपाल की चिंताएं कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर हैं जबकि निर्यातक इसे गलतफहमी बता रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करेंगे तो फल काले पड़ जाएंगे। इसीलिए फसल को बचाने और फलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कीटनाशकों का इस्तेमाल जरूरी है।

गोरखपुर के किसानों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। वो बताते हैं कि नेपाल को आम का निर्यात रुकने से उनके पास बहुत कम विकल्प बचे हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के सभी आम किसानों का हाल एक जैसा नहीं है।

बाराबंकी के आम किसानों का कहना है कि नेपाल के फैसले का उनके कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। वो बताते हैं कि उनके आम कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं, जिससे किसी एक देश पर उनकी निर्भरता कम हो जाती है और उन्हें व्यापार में आने वाली रुकावटों से निपटने में मदद मिलती है।

उधर, नेपाल में भारतीय आम के आयात पर लगी पाबंदियों से स्थानीय उत्पादकों को कुछ राहत मिली है, क्योंकि इस सीजन में उन्हें भारतीय आमों से मुकाबला नहीं करना पड़ेगा। जबकि, व्यापारियों का कहना है कि घरेलू उत्पादन सिर्फ कुछ महीनों तक ही चलता है, ऐसे में शायद बाजार की मांग को पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

उन्हें डर है कि इससे कीमतें बढ़ सकती हैं और उन व्यवसायों पर असर पड़ सकता है जो आम की सप्लाई पर निर्भर हैं। फिलहाल, जैसे-जैसे बागों में आम की फसल पक रही है, सीमा के दोनों ओर किसान और व्यापारी उम्मीद कर रहे हैं कि सीजन खत्म होने से पहले ये विवाद सुलझ जाएगा।

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