Karan Johar: आज के हिंदी सिनेमा में बहुत कम ऐसे फिल्म निर्माता हैं, जिन्होंने मुख्य धारा के बॉलीवुड को करण जौहर जितना आकार दिया हो। सोमवार को वे 54 साल के हो गए। लगभग तीन दशकों में जौहर हिंदी फिल्म जगत की व्यावसायिक रूप से सबसे ज्यादा सफल और सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली आवाजों में से एक बनकर उभरे हैं। उन्होंने रोमांस, पारिवारिक भावनाओं, ग्लैमर और महत्वाकांक्षी कहानियों को एक ऐसी सिनेमाई भाषा में पिरोया है जो पूरी तरह से उनकी अपनी है।
धर्मा प्रोडक्शंस के सर्वेसर्वा के तौर पर जौहर ने एक सम्मानित पारिवारिक बैनर को भारत के सबसे प्रभावशाली मनोरंजन स्टूडियो में तब्दील कर दिया। उन्होंने नई प्रतिभाओं को लॉन्च किया, सफल फिल्म निर्माताओं का साथ दिया, सिनेमा और टेलीविजन के जरिए लगातार लोकप्रिय संस्कृति को आकार दिया।
25 मई, 1972 को जाने-माने फिल्म निर्माता यश जौहर और हीरू जौहर के घर जन्मे करण, फिल्मों की दुनिया में ही पले-बढ़े। फिर भी, अपने पिता की विरासत को बस आगे बढ़ाने की जगह, उन्होंने दिल को छू लेने वाली कहानियों, शानदार दृश्यों और ऐसी कहानियों के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई, जो हर पीढ़ी के दर्शकों से जुड़ीं।
जौहर ने 1998 में “कुछ कुछ होता है” के साथ अपने निर्देशन की शुरुआत की। ये एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जो ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसने उन्हें बॉलीवुड के अग्रणी फिल्म निर्माताओं में स्थापित कर दिया। मधुर संगीत, युवा प्रेम और भावनात्मक गहराई से सजी इस फिल्म ने पूरी एक पीढ़ी के दिलों पर राज किया और आज भी ये आधुनिक हिंदी सिनेमा की सबसे अहम फिल्मों में से एक मानी जाती है।
इसके बाद उन्होंने “कभी खुशी कभी गम” बनाई, जो एक शानदार पारिवारिक ड्रामा था और जिसमें भारतीय परंपराओं के साथ-साथ एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी जीवनशैली का मेल था। इसे भारत समेत दुनियाभर में कल्ट सिनेमा का दर्जा मिला, जिससे भव्य कहानी कहने और भावनात्मक पारिवारिक कहानियों के लिए जौहर की साख और मजबूत हुई।
तब से जौहर फिल्म निर्माता के तौर पर और भी परिपक्व हुए हैं और अब वे ज्यादा गंभीर और गहरी थीम पर काम कर रहे हैं। “कभी अलविदा ना कहना” में उन्होंने जटिल रिश्तों, अकेलेपन और बेवफाई जैसे विषयों को गहराई से दिखाया जबकि “माई नेम इज खान” में उन्होंने वैश्विक तनावों की पृष्ठभूमि में पहचान, नस्लवाद और मानवतावाद जैसे मुद्दों को उठाया।
हाल ही में, जौहर ने “रॉकी और रानी की प्रेम कहानी” के साथ निर्देशन में वापसी की। इस फिल्म में रणवीर सिंह और आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में थे और ये फिल्म समीक्षकों और बॉक्स ऑफिस, दोनों ही मामलों में सफल रही।
एक निर्माता के तौर पर, करण जौहर ने धर्मा प्रोडक्शंस के जरिए कई तरह की परियोजनाओं को लगातार समर्थन दिया है। इनमें “योद्धा”, “मिस्टर एंड मिसेज माही”, “बैड न्यूज” और एक्शन थ्रिलर “किल” शामिल हैं। “किल” को दुनिया भर के फिल्म महोत्सवों में दिखाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां मिलीं।
जौहर ने आलिया भट्ट अभिनीत फिल्म “जिगरा” समेत आर. माधवन और फातिमा सना शेख अभिनीत रोमांटिक ड्रामा “आप जैसा कोई” का भी निर्माण किया है। फिल्म निर्माण के अलावा, जौहर अपने सेलिब्रेटी टॉक शो “कॉफी विद करण” के जरिए एक जानी-मानी टेलीविजन हस्ती बन गए। इस शो ने अपनी बेबाक बातचीत, हास्य और पॉप कल्चर अपील के साथ भारत में सेलिब्रेटी इंटरव्यू को एक नया रूप दिया। उनकी हाजिरजवाबी और आकर्षक होस्टिंग शैली ने इस शो को यादगार बना दिया।
इन सालों में, जौहर को कई सम्मान मिले, जिनमें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्म फेयर पुरस्कार शामिल हैं। 2020 में, उन्हें भारतीय सिनेमा और मनोरंजन में उनके योगदान के लिए भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म श्री से सम्मानित किया गया।