Kerala: छात्र संघ से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सियासी सफर, जमीन से जुड़े नेता हैं वीडी सतीशन

Kerala: कोच्चि के तेवरा की संकरी गलियों में कॉलेज की चुनाव रणनीतियों की योजना बनाने से लेकर केरल के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने की तैयारी तक, वी.डी. सतीशन का सियासी सफर एक ऐसी कहानी है जिसके बारे में उनके करीबी लोगों का कहना है कि ये बहुत पहले ही यह साफ हो गया था कि एक दिन वे राज्य की कमान जरूर संभालेंगे।

43 सालों से रंजीत तंबी, सतीशन के सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं। उनकी दोस्ती की शुरुआत सेक्रेड हार्ट कॉलेज, तेवरा से हुई, जो 1980 के दशक में छात्र राजनीति के लिहाज से बेहद प्रतिस्पर्धी और विचारधारा से भरपूर था। कोच्चि स्थित अपने घर में बैठे तंबी कॉलेज यूनियन चुनाव की एक घटना को याद करते हुए रंजीत बताते हैं कि उस दिन ही सतीशन की राजनीतिक सूझबूझ का सबको पता चल गया था।

हालांकि, उनकी तीक्ष्ण राजनीतिक सूझबूझ उस व्यक्ति का मात्र एक पहलू है, जिन्होंने यूडीएफ के अभियान के केंद्र में रहकर हालिया राज्य विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ वामपंथी सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला। सतीशन के बड़े भाई का कहना है कि नेतृत्व क्षमता उनमें स्वाभाविक रूप से थी और बहुत कम उम्र में ही इसका पता चल गया था।

स्कूल में कक्षा के नेतृत्व से लेकर महात्मा गांधी विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष तक, सतीशन ने छात्र राजनीति में निरंतर प्रगति की और 1990 के दशक में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। 1996 में अपना पहला विधानसभा चुनाव हारने के बाद, उन्होंने 2001 में वापसी की और पारवूर से जीत हासिल की और तब से सीट उनका मजबूत किला बन गई है।

एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने और कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद, सतीशन को राजनीति में आने के लिए हमेशा अपने परिवार का समर्थन मिला। आज भी सतीशन के भाई-बहन कोच्चि के नेटूर इलाके में राजनीतिक चकाचौंध से दूर शांतिपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि उन्हें हमेशा से सतीशन से यही उम्मीद थी। सतीशन केरल उच्च न्यायालय में वकालत भी कर चुके हैं। घरवालों को उम्मीद थी कि वे कांग्रेस पार्टी में भी अहम पद पर पहुंचेंगे।

हालांकि, बहुत कम लोगों ने कल्पना की थी कि यह सफर अंततः मुख्यमंत्री के पद तक ले जाएगा। सतीशन के आसपास पले-बढ़े लोग कहते हैं कि दृढ़ संकल्प बचपन से ही उनका एक प्रमुख गुण था। सतीशन के छोटे भाई अजयकुमार के करीबी दोस्त जयन, जो अब परिवार के पैतृक घर के पास एक किराना स्टोर चलाते हैं, वे बताते हैं कि सतीशन की दृढ़ इच्छाशक्ति और काम को पूरा करने की क्षमता उन्हें आज भी याद है।

तेवरा स्थित सेक्रेड हार्ट कॉलेज में सतीशन की इस उपलब्धि पर हर कोई गौरवान्वित महसूस कर रहा है। कॉलेज के वर्तमान कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कहना है कि इस संस्थान ने दशकों से कई प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं को जन्म दिया है, जिनमें के. एम. मणि और थॉमस आइज़ैक शामिल हैं। लेकिन सतीशन केरल के सर्वोच्च राजनीतिक पद पर आसीन होने वाले इसके पहले पूर्व छात्र होंगे।

पूर्व उप-प्रधानाचार्य फादर ऑस्टिन मुख्यमंत्री पद के लिए नामित व्यक्ति को एक ऐसे छात्र नेता के रूप में याद करते हैं, जो केरल की कैंपस राजनीति के सबसे अशांत दौर में सबसे अलग खड़े रहे। अपने शिक्षकों के बीच, सतीशन एक उत्साही पाठक, एक कुशल वाद-विवादकर्ता और एक छात्र नेता के रूप में जाने जाते थे, जो अपनी कई अन्य गतिविधियों के बावजूद भी कक्षा में भी शानदार नतीजे हासिल करते रहे।

हालांकि, लंबे समय से सतीशन के मित्र रहे रंजीत के लिए उनमें सबसे महत्वपूर्ण गुण चुनावी जीत या राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत संबंधों को महत्व देना है। सतीशन के बारे में बातचीत करने पर उनकी मां का जिक्र कई बार आता है। सतीशन के करीबी मित्र रंजीत बताते हैं कि वे अपने माता-पिता से बहुत गहरे रूप से जुड़े हुए थे और उनके बारे में बात करते समय अक्सर भावुक हो जाते हैं।

वडास्सेरी परिवार का पुराना घर अब भाई-बहनों द्वारा बनाए गए अलग-अलग घरों में तब्दील हो चुका है। लेकिन सतीशन और उनके छोटे भाई के पास अभी भी वहां जमीन है। भले ही वीडी सतीशन राज्य के मुखिया के पद को संभालने की तैयारी कर रहे हों लेकिन उनके सबसे करीबी लोगों का मानना ​​है कि वी. डी. सतीशन का एक बड़ा हिस्सा अभी भी उस छोटी सी दुनिया में बसा हुआ है जहां उनका जन्म हुआ था यानी नेटूर में उनका पारिवारिक घर, तेवरा कॉलेज के गलियारे और उस दौर की राजनीति जिससे दशकों पहले उन्होंने सियासत के गुर सीखे।

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