Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बीते कहा कि भारत निश्चित रूप से ‘विश्वगुरु’ बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा, और देश के भविष्य के बारे में किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि पहले लोगों को संदेह था कि राम मंदिर कभी बन भी पाएगा या नहीं, लेकिन वो बनकर सामने आया। ठीक उसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना भी तय है।
भागवत ने शाम को नागपुर शहर के बाहरी इलाके जामथा में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) के परिसर में बन रहे ‘भारत दुर्गा शक्ति स्थल’ मंदिर की आधारशिला रखने के बाद ये बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना लगातार कोशिशों और सामूहिक अनुशासन के जरिए साकार होगा, और उन्होंने भरोसा जताया कि इस तरह का बदलाव मौजूदा पीढ़ी में देखा जा सकता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत के भविष्य को लेकर किसी भी संदेह को छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत के भविष्य पर संदेह न करें। साहस और आत्मनिर्भरता के साथ जिएं और इन मूल्यों को अपने रोजाना के जीवन में अपनाएं। भारत मजबूत होगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। लोगों को संदेह था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन ये बना। उसी प्रकार भारत का विश्वगुरु बनना तय है।” भागवत ने कहा, “इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि ये होगा या नहीं। जो होना तय है, वही होगा।”
उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि दृढ़ता से काम करने पर आखिरकार सफलता मिलती है। उन्होंने आगे कहा, “यदि हम अपने संकल्प के मुताबिक कदम दर कदम कार्य करें, तो भारत मजबूत, सदाचारी और वैश्विक मार्गदर्शक बनेगा।” भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए, लोगों को पहले भारत को गहराई से समझना होगा और फिर इसे अपने रोजाना के जीवन में अपनाना शुरू करना होगा।
संघ प्रमुख ने कहा, “भारत माता की पूजा करने के लिए हमें स्वयं भारत बनना होगा।” उन्होंने कहा कि देश को उसके अपने सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए, न कि 150 सालों में विकसित औपनिवेशिक या पश्चिमी नजरिए से। आरएसएस प्रमुख ने नागरिकों से “पश्चिमी सोच को त्यागने” और विचार एवं आचरण में भारतीय परंपराओं से फिर से जुड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ये बदलाव रोजाना के जीवन में छोटे लेकिन सार्थक बदलावों से शुरू होगा, जैसे कि भाषा, पहनावा, खान-पान की आदतें और सांस्कृतिक प्रथाएं। उन्होंने कहा, “भारत को जानना, स्वीकार करना और दैनिक जीवन में जीना जरूरी है।” इस बात पर जोर देते हुए कि आत्म-साक्षात्कार की ऐसी प्रक्रिया के जरिए ही एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत माता की पूजा का विचार केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लोगों को अपने जीवन में खुद को भारत के स्वरूप में ढालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नागपुर में ‘भारत माता’ मंदिर का विचार दिवंगत मोरोपंत पिंगले का था। उनके मुताबिक ये विचार तब आया जब एकता यात्रा के दौरान भारत माता की मूर्तियों को देश के कई अलग-अलग रास्तों से ले जाया गया था।
संघ प्रमुख ने कहा, “उस वक्त नागपुर में भारत माता मंदिर बनाने का विचार मोरोपंत पिंगले के मन में आया। उन्होंने कहा, “यह मेरी कल्पना नहीं थी।” उन्होंने आगे बताया कि यात्रा से लाई गई चार मूर्तियों में से एक आखिरकार नागपुर पहुंची, लेकिन दूसरे राष्ट्रीय आंदोलनों ने लोगों को दशकों तक व्यस्त रखा, जिससे परियोजना में देरी हुई।
उन्होंने कहा कि मौजूदा अस्पताल में अब भारत माता का मंदिर भी शामिल है, जो प्रतीकात्मक रूप से शक्ति, ज्ञान और बुद्धिमत्ता का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम से प्रेरित होकर, मुझे लगा कि भारत माता को दुर्गा के रूप में होना चाहिए, जो दस भुजाओं वाली शक्ति की देवी हैं। शक्ति के बिना, सत्य ही संसार में विजय नहीं हासिल कर सकता।”
उन्होंने कहा कि भले ही भारत सत्य पर आधारित हो, लेकिन बाकी दुनिया अक्सर इस सिद्धांत का पालन करती है कि जिसके पास सत्ता है, वही सही है। इस मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ श्री गुरुशरणजी महाराज, स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी मित्रानंदजी महाराज, साध्वी ऋतंभरा और धीरेंद्र शास्त्री सहित कई धार्मगुरु मौजूद थे।
फडनाविस ने ‘भारत दुर्गा शक्ति स्थल’ की परिकल्पना के लिए आरएसएस प्रमुख को धन्यवाद देते हुए कहा कि ये शक्ति का प्रतीक है, जो देश में एक नई चेतना को जागृत करेगा और सभी को प्रेरित करेगा। गडकरी ने कहा कि मंदिर का भूमि पूजन सभी के लिए सौभाग्य का क्षण था। उन्होंने कहा, “इस पहल के पीछे की प्रेरणा राष्ट्र निर्माण है। इससे पूरे देश को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।” स्वामी अवधेशानंद गिरि ने भागवत की सौम्य प्रकृति और असाधारण नेतृत्व की प्रशंसा की।
उन्होंने कहा, “भारत सिर्फ एक भूमि नहीं है, बल्कि एक देवी है, इसलिए इसकी पूजा की जानी चाहिए।” गिरि ने कहा, “ये ईश्वर की इच्छा है कि भारत ‘अखंड भारत’ की परिकल्पना की ओर अग्रसर हो रहा है और कुछ समय बाद भारत अपनी खोई हुई सीमाओं को फिर से हासिल करेगा और अपना खोया हुआ गौरव पुनः अर्जित करेगा।”
उन्होंने कहा और साथ ही ये भी जोड़ा कि आने वाली शताब्दियों में देश विश्व का नेतृत्व करेगा। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सामाजिक कार्यों में आरएसएस स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने देश के नागरिकों से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को आरएसएस को समर्पित करने की अपील की। स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने कहा कि नागपुर उनके और सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र है। उन्होंने “राम राज्य” की स्थापना की जरूरत पर बल दिया और “लव जिहाद” पर चिंता जताते हुए कहा कि ये अब कॉर्पोरेट जगत में भी दिखाई दे रहा है। साध्वी ऋतंभरा ने मंदिर के निर्माण पर खुशी जताई और समाज में एकता की अपील की।