Biometric System: उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें मतदान केंद्रों पर फर्जी मतदान रोकने के लिए निर्वाचन आयोग को उंगली के निशान और आंखों की पुतली के आधार पर पहचान सुनिश्चित करने वाली बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिका में किए गए अनुरोध पर कुछ राज्यों में जारी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में विचार नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, अगले संसदीय चुनाव और/या राज्य विधानसभा चुनावों से पहले इस तरह का उपाय अपनाना उचित है या नहीं, इस पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। नोटिस जारी करें।’’ उच्चतम न्यायालय ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर केंद्र, निर्वाचन आयोग और कई राज्यों से जवाब तलब किया।
याचिका में कहा गया है कि नागरिकों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि प्रलोभन, अनुचित प्रभाव और फर्जी मतदान अब भी चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता और शुचिता को प्रभावित कर रहे हैं। शीर्ष अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित उपाध्याय ने पीठ को बताया कि याचिका में की गई प्रार्थना से प्रलोभन और फर्जी मतदान पर रोक लगेगी। पीठ ने टिप्पणी की कि इसके लिए नियमों में बड़े बदलाव करने होंगे और इससे भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 के तहत अपनी पूर्ण शक्ति का इस्तेमाल करते हुए मतदाता पहचान को मजबूत करने और प्रलोभन, अनुचित प्रभाव, प्रतिरूपण व फर्जी मतदान को समाप्त करने के लिए उंगली के निशान और आंखों की पुतली पर आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू कर सकता है।
सुनवाई के दौरान, उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि वह पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के लिए ऐसी व्यवस्था लागू करने का अनुरोध नहीं कह रहे हैं। याचिका में दलील दी गई है कि मतदान केंद्रों पर उंगली के निशान और आंखों की पुतली पर आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू करने से यह सुनिश्चित होगा कि केवल वास्तविक और विधिवत पंजीकृत मतदाताओं को ही वोट डालने की अनुमति मिले।
याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान में मतदाताओं की पहचान मतदाता पहचान पत्रों और मैनुअल सत्यापन पर आधारित है, जिसका पुरानी तस्वीरों, लिपिकीय त्रुटियों और वास्तविक समय पर आधारित सत्यापन की कमी के कारण दुरुपयोग होने की आशंका है। इसमें कहा गया है कि इससे प्रतिरूपण और एक ही व्यक्ति द्वारा या अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा एक ही चुनाव में कई बार मतदान करने की आशंका बढ़ जाती है।
याचिका में कहा गया है कि हर व्यक्ति के उंगली के निशान और आंखों की पुतलियां अलग होती हैं, जिसके चलते इन पर आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन से फर्जी मतदान को समाप्त किया जा सकेगा और ‘एक नागरिक, एक वोट’ का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। याचिका के मुताबिक, आबादी का एक बड़ा हिस्सा प्रवासी है, जिसके कारण अक्सर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूचियों में विसंगतियां होती हैं। इसमें कहा गया है कि उंगली के निशान और आंखों की पुतली पर आधारित बायोमेट्रिक पहचान वास्तविक समय में सत्यापन को सक्षम बनाती है।
याचिका में कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा लागू की गई ‘आधार’ प्रणाली ने भारत में एक मजबूत बायोमेट्रिक पहचान ढांचा सफलतापूर्वक स्थापित किया है।
इसमें दलील दी गई है, ‘‘बैंकिंग और कल्याणकारी योजनाओं के वितरण जैसे क्षेत्रों में आधार के इस्तेमाल से धोखाधड़ी में काफी कमी आई है और सटीक पहचान सुनिश्चित हो पाई है। लिहाजा, चुनावों में भी इसी तरह की बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली लागू करना एक तार्किक और प्रभावी कदम होगा।’’