Corbett park: लंगूर और हिरण की दोस्ती प्रकृति की एक अद्भुत मिसाल है, जो आम तौर पर जंगलों में देखने को मिलती है। पेड़ों की चोटी पर बैठे ये लंगूर जंगल में होने वाली हर हरकत पर ऐसे नजर रख रहे हैं मानो जंगल के रखवाले हों।
वहीं, जमीन पर सावधानी से घास चरते इन हिरणों को अपनी सूंघने की क्षमता पर पूरा भरोसा है। जंगल में जानवरों को जिंदा रहने के लिए सिर्फ ताकत ही नहीं, बल्कि आपसी तालमेल पर भी निर्भर रहना पड़ता है। वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि दुनिया भर के जंगलों में हजारों सालों से एक ऐसी व्यवस्था चली आ रही है जिसके तहत लंगूर और हिरण जैसे जानवर आपस में तालमेल बिठाकर शिकारियों की मौजूदगी के बारे में एक-दूसरे को आगाह करते है।
जब लंगूर किसी शिकारी को देख लेते हैं, तो वो जोर से आवाज निकालकर हिरणों और दूसरे जानवरों को चेतावनी देते हैं। बदले में, हिरण अपनी तेज सूंघने की शक्ति का इस्तेमाल करके खतरे को भांप लेते हैं। इस तरह एक अलर्ट सिस्टम बन जाता है, जो दूसरे जानवरों को जिंदा रहने में मदद करता है।
ये नेचुरल अलर्ट सिस्टम उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में खूब फल-फूल रहा है। यहां बड़ी संख्या में बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी और हिरण और चीतल जैसे शिकार जानवर रहते हैं। ये लंगूर और हिरण का रिश्ता भोजन से भी जुड़ा हुआ है। पेड़ों पर खाते समय लंगूर अक्सर फल और पत्तियां नीचे गिरा देते हैं, जिससे जमीन पर मौजूद हिरणों को भोजन में आसानी होती है।
ये आपसी अलर्ट सिस्टम जंगलों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे शिकारी और शिकार, दोनों ही जंगल में जीवित रह सकें।