Holi: बीकानेर के चौक-चौराहों पर जीवंत हो उठती है 400 साल से ज्यादा पुरानी लोक नाट्य परंपरा ‘रम्मत’

Holi:  रंगों के त्योहार होली से पहले राजस्थान के बीकानेर में हर साल एक अनोखी परंपरा होती है।

शहर के हर कोने में पारंपरिक उत्सवों की झलक दिखने लगती है, इन्हीं में से एक है मशहूर रम्मत, जो सिर्फ एक नाट्य विधा नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर है। इसमें संगीत, नृत्य और पौराणिक कथाएं और इतिहास की कहानियां शामिल होती हैं।

इस परंपरा की एक खास बात ये है कि इसमें सभी कलाकार पुरुष होते हैं।

पारंपरिक लोक नाटक में खास रस्में होती हैं, जिनमें स्थानीय देवी-देवताओं का सम्मान किया जाता है।

लोगों के लिए, रम्मत न सिर्फ एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि एक सामाजिक कार्यक्रम भी है जिसका मकसद युवा पीढ़ी के बीच इलाके की परंपराओं और विरासत को संरक्षित करना है।

बसंत पंचमी के साथ ही इसकी तैयारियां शुरू हो जाती हैं और होलाष्टक के लगते ही शहर में रम्मतों की धूम मचने लगती है। यह न सिर्फ मनोरंजन का साधन है,बल्कि इसमें समाज के विभिन्न मुद्दों को व्यंग्य और हास्य के माध्यम से पेश किया जाता है।

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